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जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में कलेक्ट्रेट राजस्व स्टाफ की समीक्षा बैठक आयोजित की गई


इटावा 10 जुलाई, 2026-जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में कलेक्ट्रेट राजस्व स्टाफ की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी महोदय ने राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में बड़ी संख्या में मुकदमे वर्षों से लंबित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारी न्यायालय का कार्य करते हैं, इसलिए निर्णय लेने से डरने के बजाय निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि धारा-34 के अंतर्गत राजस्व विवादित वादों में 3 से 5 वर्ष तक के 136 तथा 5 वर्ष से अधिक समय से लंबित 7 वाद चिंताजनक हैं। तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार का मुख्य दायित्व न्यायिक कार्य करना है। फाइलों का गंभीर अध्ययन करें, कानून को समझें और समयबद्ध ढंग से निर्णय लें। आम नागरिक न्याय पाने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाए, यह सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने धारा-24 के अंतर्गत लंबित पैमाइश संबंधी प्रकरणों को प्राथमिकता से निस्तारित करने के निर्देश दिए। कहा कि अधिक से अधिक पैमाइश डिजी-रोवर तकनीक से कराई जाए, जिससे सटीक माप सुनिश्चित हो सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि धारा-24 शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। सभी प्रकरणों का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है, इसलिए किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी महोदय ने धारा-80 के अंतर्गत अधिकारियों को न्यायालयीन आदेशों एवं विधिक प्रावधानों का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत यथासंभव उसी दिन निर्णय सुनाया जाए तथा अधिकतम 15 दिनों के भीतर निर्णय एवं आदेश जारी किए जाएं।
उन्होंने बताया कि धारा-67 के अंतर्गत कुल 1073 वाद लंबित हैं। सभी उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार प्रतिदिन न्यायालयीन कार्यों की समीक्षा करें, छोटे-छोटे मामलों का तत्काल निस्तारण करें तथा प्रत्येक दिन की कार्यवाही का लेखा-जोखा रखें। उन्होंने कहा कि जनता का कार्य करना प्रशासन का दायित्व है, इसलिए फाइलों का अध्ययन कर कानून के अनुसार गुणवत्तापूर्ण निर्णय लिए जाएं।
बैठक में जिलाधिकारी महोदय ने राजस्व न्यायालयों के कम्प्यूटरीकरण की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि वादी एवं प्रतिवादी दोनों के मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से पोर्टल पर फीड किए जाएं, जिससे सूचना का आदान-प्रदान सुगम हो सके। उन्होंने बताया कि अर्जेंट नकल तथा साधारण नकल के 26-26 प्रार्थना पत्र लंबित हैं, जिन्हें तत्काल निस्तारित किया जाए।
उन्होंने धारा-98 के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की संख्या शीघ्र समाप्त करने के निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व विभाग की रैंकिंग संतोषजनक नहीं है। सभी अधिकारी लक्ष्य निर्धारित कर लंबित मामलों को समाप्त करें ताकि जनपद की रैंकिंग में सुधार हो सके।
कृषक दुर्घटना बीमा योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी महोदय ने निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों की आख्या एक से दो सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से प्रेषित की जाए।
उन्होंने कहा कि तहसीलों के कम्प्यूटर कक्ष में सर्वाधिक भीड़ रहती है, इसलिए अधिकारी वहां विशेष समय दें। यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी सिस्टम सुचारु रूप से संचालित हों। अमलदरामद की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार समय-समय पर परिसर का निरीक्षण करते रहें।
सार्वजनिक सेवायोजन एवं दुर्घटना सहायता से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि उपजिलाधिकारी स्तर पर लंबित सभी प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि चरित्र सत्यापन एवं सेवायोजन से जुड़े प्रकरण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए जैसे ही आवेदन प्राप्त हों, उनका तत्काल सत्यापन कर प्रेषित किया जाए।
माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद से संबंधित लंबित प्रकरणों पर जिलाधिकारी महोदय ने निर्देश दिए कि सभी मामलों का एक सप्ताह के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
तहसील दिवस की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि जनपद की रैंकिंग 37वीं है, जिसे सुधारना आवश्यक है। तहसील दिवस में प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण करते हुए 31 जुलाई तक लंबित मामलों को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल संख्या नहीं, बल्कि क्वालिटी डिस्पोजल पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आईजीआरएस पोर्टल की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी महोदय ने कहा कि यह शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल स्थायी कार्य है। सभी अधिकारी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष ध्यान दें ताकि शिकायतकर्ता पूर्ण रूप से संतुष्ट हो सके।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को निर्देश दिए कि प्रत्येक तहसील क्षेत्र में एक वन क्षेत्र विकसित किया जाए। इसके लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) एवं सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से अधिकाधिक वृक्षारोपण कराया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक दायित्व है और सभी अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर इस अभियान को सफल बनाएं।
उक्त बैठक में अपर जिलाधिकारी बिपिन कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक संदीप श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट राजेन्द्र बहादुर, समस्त उप जिलाधिकारी, समस्त तहसीलदार, समस्त संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थिति रहे।

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