दुग्ध विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर दुग्ध स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव आयोजित, 52 प्रशिक्षार्थियों के प्रशिक्षण का शुभारम्भ
इटावा
दुग्ध विकास विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे दुग्ध स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डेयरी एवं पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 52 प्रशिक्षार्थियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को वैज्ञानिक पशुपालन, आधुनिक डेयरी प्रबंधन, पशुपोषण, दुग्ध उत्पादन वृद्धि की तकनीकों तथा शासन की विभिन्न लाभकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि डेयरी एवं पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। यदि किसान आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर पशुपालन करें तो वे अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की देशी नस्लों में गिर गाय का दूध अत्यंत गुणकारी एवं पौष्टिक माना जाता है, जबकि साहीवाल नस्ल की गाय का दूध भी उच्च गुणवत्ता वाला होता है। उन्होंने लोगों से गौसंरक्षण एवं गौसेवा के प्रति जागरूक होने का आह्वान करते हुए कहा कि सहभागिता योजना के माध्यम से गौशालाओं से गाय लेकर उनका पालन-पोषण करें। इससे गौवंश संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा परिवारों को शुद्ध एवं पौष्टिक दूध उपलब्ध होगा, जो बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है।
मुख्य विकास अधिकारी ने किसानों से जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर गोबर से निर्मित जैविक खाद का अधिकाधिक प्रयोग किया जाए। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से भूमि की उत्पादकता प्रभावित होती है, मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव एवं उपयोगी कीट नष्ट हो जाते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना एवं आमजन के जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है। उन्होंने युवाओं एवं किसानों से डेयरी व्यवसाय के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, बकरी पालन एवं गौपालन जैसे स्वरोजगार आधारित व्यवसायों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मेहनत, लगन, ईमानदारी और सकारात्मक सोच के साथ किया गया प्रत्येक कार्य सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है तथा आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करता है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि पशुपालन केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास एवं आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता बनाए रखने तथा समाज को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान करते हुए कहा कि “निरोगी रहें, स्वस्थ रहें और स्वच्छ रहें” यही हम सभी का संकल्प होना चाहिए।
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा संचालित नंद बाबा दुग्ध मिशन, मिनी नंदिनी योजना एवं सहभागिता योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने पशुपालकों को पशुओं के लिए नेपियर घास का उत्पादन एवं उपयोग बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे कम लागत में पौष्टिक चारा उपलब्ध होता है और दुग्ध उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
उन्होंने सभी पशुपालकों से पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण, कृमिनाशन एवं आवश्यक चिकित्सीय उपचार कराते रहने का आग्रह करते हुए कहा कि स्वस्थ पशु ही अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन करते हैं। इसलिए वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन अपनाकर डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक डेयरी प्रबंधन, संतुलित पशु आहार, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की वैज्ञानिक तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं एवं पशुपालकों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ जनपद में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने तथा किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को नई गति प्रदान करेगा।
कार्यक्रम में *मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी श्री धर्मेन्द्र सिंह, वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक श्री रमाकान्त यादव सहित पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग* के अधिकारी, कार्मिक, प्रशिक्षक तथा बड़ी संख्या में पशुपालक एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
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